जंतर मंतर पर NEET छात्रों का आंदोलन: क्या हुआ और क्यों?

हुआ और क्यों?

पिछले कुछ महीनों से दिल्ली के जंतर मंतर पर NEET परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन सुर्खियों में रहा है। यह ब्लॉग इस पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार तरीके से समझने की कोशिश है — बिना किसी एक पक्ष का समर्थन या विरोध किए, सिर्फ अब तक सामने आई जानकारी के आधार पर।

शुरुआत कैसे हुई

यह आंदोलन 6 जून 2026 से जंतर मंतर पर शुरू हुआ। इसे “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) नाम के एक युवा-केंद्रित व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन ने, वामपंथी छात्र संगठनों — जैसे AISF, AISA और SFI — के साथ मिलकर शुरू किया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 2026 के NEET पेपर लीक मामले में हुई अनियमितताओं की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें।

आंदोलन के दौरान लद्दाख के जाने-माने पर्यावरणविद् और इंजीनियर सोनम वांगचुक भी इससे जुड़ गए और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। बाद में पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाया, जिसकी राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की।

20 जुलाई: “संसद चलो” मार्च और झड़प

आंदोलन का सबसे विवादित मोड़ 20 जुलाई 2026 को आया, जब छात्रों और किसान संगठनों ने मिलकर संसद की तरफ “संसद चलो” मार्च निकालने की कोशिश की। दिल्ली पुलिस का कहना था कि इस मार्च के लिए अनुमति नहीं ली गई थी। बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, पथराव में एक विशेष पुलिस आयुक्त सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर अनावश्यक बल प्रयोग किया।

इस घटना पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सवाल उठाया कि जब प्रदर्शन अहिंसक था, तो लाठीचार्ज की नौबत क्यों आई। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि जंतर मंतर और पूरे देश में बनी स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है, और मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी ली।

इसके बाद CJP ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह राणा के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। सरकार की तरफ से आश्वासन दिया गया कि भाजपा-शासित राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे, और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा।

आंदोलन थमा नहीं

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और मुख्य आंदोलन खत्म होने के बावजूद मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ। 29 जुलाई को वामपंथी छात्र संगठनों — जिनमें JNU छात्र संघ (JNUSU) भी शामिल है — ने फिर से जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। इस बार मांग थी कि बिहार, बंगाल और अन्य राज्यों में आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों को रिहा किया जाए, और “छात्रों के अपराधीकरण” को रोका जाए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन से जुड़े कई सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक कर दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

27 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों को लेकर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान द्वारा सुरक्षित है, और सिर्फ आंदोलन होने भर से पुलिसिया ज्यादती को जायज नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिसकर्मियों की जान भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, और प्रदर्शनों के दौरान अनुशासन जरूरी है।

दोनों पक्षों की बात

इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि इसमें दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं:

  • छात्रों और विपक्ष का पक्ष: पुलिस ने एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर अनुपातहीन बल का इस्तेमाल किया, छात्रों को बेवजह हिरासत में लिया गया, और आंदोलन से जुड़े लोगों को बाद में भी निशाना बनाया जा रहा है।
  • दिल्ली पुलिस का पक्ष: पथराव में पुलिसकर्मी घायल हुए, अनुमति के बिना मार्च निकाला जा रहा था, और कार्रवाई सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई।

इस विवाद की पूरी और निष्पक्ष जांच अभी जारी है, और अदालतें भी इस पर नजर रखे हुए हैं।

निष्कर्ष

NEET को लेकर छात्रों का यह आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा में गड़बड़ी का मामला नहीं रहा — यह परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही, प्रदर्शन के अधिकार, और पुलिस बल के इस्तेमाल की सीमाओं जैसे बड़े सवालों तक जा पहुंचा। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस आंदोलन की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, लेकिन गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और जवाबदेही जैसे कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं।

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